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ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में अधिक प्रचलित हैं। ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का सकारात्मक पारिवारिक इतिहास भी इस प्रकार के कैंसर के लिए एक मजबूत जोखिम कारक माना जाता है।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर ओवरी (अंडाशय) में शुरू होने वाली कैंसरस वृद्धी को संदर्भित करता है । यह भारतीय महिलाओं में तीसरा सबसे आम कैंसर है। हालांकि, यह उन कैंसरों में से एक है जिसका उन्नत चरणों में पता चलता है जब उनका इलाज करना तुलनात्मक रुप से चुनौतीपूर्ण होता है।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के विकास का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है। यह उन महिलाओं में अधिक प्रचलित है जिनकी उम्र 50 साल से ऊपर हैं और जो रजोनिवृत्ति के चरण में पहुंच चुकी हैं। ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का सकारात्मक पारिवारिक इतिहास भी इस प्रकार के कैंसर के लिए एक मजबूत जोखिम कारक माना जाता है।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर जिस प्रकार की सेल्स (कोशिकाओं) से उत्पन्न होते हैं उसके आधार पर ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है :
जो लगभग 90% ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, यह ओवरी (अंडाशय) के बाहर अस्तर बानाने वाली ऊतक की पतली परत से उत्पन्न होते हैं।
जो लगभग 7% ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, और यह हार्मोन-स्रावित करने वाली सेल्स (कोशिकाओं) को ले जाने वाले ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) ऊतकों में शुरू होता हैं। अन्य ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) ट्यूमर के विपरीत, स्ट्रोमल ट्यूमर का निदान तुलनात्मक रुप से शुरुआती चरणों में किया जाता है।
यह ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का दुर्लभ प्रकार है जो युवा महिलाओं में अधिक प्रचलित है। ये ट्यूमर अंडे बनाने वाली सेल्स (कोशिकाओं) से उत्पन्न होते हैं।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर अक्सर जब तक पेल्विस (श्रोणि) और पेट के भीतर फैल न जाए तब तक इसका पता नहीं चलता है। देर से पता चलने की वजह से रोग उन्नत चरणों में विकसित होता है, इसके कारण बीमारी का उपचार और प्रबंधन दोनों ही चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। दूसरी ओर, प्रारंभिक चरणों के ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का सर्वोत्तम नैदानिक परिणामों के साथ इलाज किए जाने की अधिक संभावना होती है क्योंकि शुरुआती चरणों में रोग काफी हद तक केवल उस अंग तक ही सीमित होता है। ओवरी (अंडाशय) पेट के निचले क्षेत्र में स्थित होते हैं और उनका स्थान परीक्षण को भी कठिन बना देता है। इसलिए, अस्पष्ट लक्षणों के साथ, ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का जल्दी पता लगाना एक मुश्किल काम होता है।
हालांकि अस्पष्ट, अन्य कम गंभीर स्थितियों के लक्षणों के विपरीत, ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लक्षण बने रहते हैं और समय के साथ अधिक बदतर हो सकते हैं। यहां ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के कुछ मुख्य लक्षण हैं जिन पर महिलाओं को नजर रखनी चाहिए :
यदि इनमें से कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक रहता है तो महिलाओं को अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
हालांकि इस बीमारी का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से ज्ञात नहीं है, निम्नलिखित कुछ कारकों की पहचान कि गई हैं जो महिलाओं में ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाते हैं :
जिन महिलाओं का गर्भावस्था का कोई इतिहास नहीं है या जिनकी 35 साल की उम्र के बाद पूर्ण-अवधि की गर्भावस्था है, उन महिलाओं में ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर विकसित होने का जोखिम अधिक होता है।
यदि किसी महिला का ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) या स्तन कैंसर का पारिवारिक इतिहास है तो उस महिला को ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के विकास का जोखिम अधिक होता हैं। /p>
उम्र के साथ ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है।
जिन महिलाओं का स्तन, यूटरीन (गर्भाशय) या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास होता है उन महिलाओं में ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का निदान होने का जोखिम अधिक होता है।
कुछ दुर्लभ प्रकार के ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर, जैसे क्लियर सेल ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर, एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं में अधिक पाए जाते हैं।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर से जुड़े जीन्स जैसे की बीआरसीए1 और बीआरसीए 2 के जनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक उत्परिवर्तन)।
रजोनिवृत्ति के बाद केवल एस्ट्रोजेन या प्रोजेस्टेरोन का उपयोग करने वाली महिलाओं में ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के विकास का जोखिम उन महिलाओं की तुलना में अधिक होता है जो एस्ट्रोजेन या प्रोजेस्टेरोन का उपयोग नहीं करती हैं।
दुर्लभ मामलों में, फर्टिलिटी दवाओं के उपयोग से 'बॉर्डरलाइन' या 'लो मैलिग्नेंट पोटेंशिअल' ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
एचसीजी में, हमारे विशेषज्ञ ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए कई परीक्षण विधियों का उपयोग करते हैं। एक सटीक निदान पर पहुंचने के लिए सामान्य रक्त परीक्षणों से लेकर उन्नत इमेजिंग परीक्षणों जैसे पेट / सीटी स्कैन तक को नियोजित किया जाता है। उपलब्ध नैदानिक जानकारी के आधार पर व्यक्तिगत उपचार योजनाएँ तैयार की जाती हैं।
शारीरिक परीक्षण के दौरान, डॉक्टर संभावित जोखिम कारकों को निर्धारित करने के लिए मरीज़ की स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सा इतिहास और अन्य पहलुओं के बारें में पूछताछ करते है। मरीजों से उन लक्षणों के बारे में भी पूछा जा सकता है जो वे अनुभव कर रहे हैं। पेट में बढ़े हुए ओवरी (अंडाशय) या तरल पदार्थ (जलोदर) के लक्षण देखने के लिए डॉक्टर एक पैल्विक परीक्षण भी कर सकते हैं।
रक्त में सीए 125 नामक बायोमार्कर की उपस्थिती देखने के लिए रक्त परीक्षण किया जा सकता है। रक्त में सीए 125 का उच्च स्तर होना ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के विकास का सूचक हो सकता है। हालांकि, यह अणु ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लिए विशिष्ट नहीं है, और अन्य बीमारियों के कारण भी इस बायोमार्कर का स्तर ऊंचा हो सकता है। यदि बार-बार पेट फूलना, कम खाने पर भी पेट भरा हुआ महसूस होना, भूख में कमी, या पेल्विस (श्रोणि) या पेट में दर्द जैसे लक्षणों का अक्सर अनुभव होता हैं, तो नैशनल इन्स्टिटूट फॉर हेल्थ ऐन्ड केयर एक्सलन्स (राष्ट्रीय स्वास्थ्य और देखभाल उत्कृष्टता संस्थान ) (एनआईसीई) के अनुसार सीए 125 रक्त परीक्षण किया जाना चाहिए।
क्या ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर आसपास के अंगों में फैल गया है या नहीं इसका पता लगाने में इमेजिंग टेस्ट मदद करते हैं । यह परीक्षण ट्यूमर का आकार, इसका सटीक स्थान, चरण और ग्रेड जैसी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान कर सकते हैं । इसके अलावा, इमेजिंग परीक्षणों के परिणाम उपचार योजना और चिकित्सा निगरानी में भी सहायता कर सकते हैं।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले इमेजिंग परीक्षणों में से एक है। यह ठोस गांठ या द्रव से भरे गांठ जैसी असामान्यताओं का पता लगाने के लिए हाई – एनर्जी साउंड वेव्ज (उच्च-ऊर्जा ध्वनि तरंगों) का उपयोग करता है। एक ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड ओवरी (अंडाशय) के आकार और ओवरी (अंडाशय) की संरचना और आसपास की संरचनाओं, जैसे वजाइन (योनि), यूटरस (गर्भाशय), ब्लैडर (मूत्राशय), या फैलोपियन ट्यूब में किसी भी असामान्यता के बारें में जानकारी प्रदान कर सकता है।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर जो पेट और पेल्विस (श्रोणि) में फैल सकता है उसके लक्षणों की जांच करने के लिए पेट / सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन की सिफारिश की जा सकती है।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर लंग्ज (फेफड़ों) में फैल गया है नहीं या लंग्ज (फेफड़ों) के आसपास तरल पदार्थ का निर्माण हुआ है इसकी जांच करने के लिए छाती के एक्स-रे की सिफारिश की जाती है ।
यह संभव है कि पेट में तरल पदार्थ का निर्माण होने पर या पेट बढा हुआ लगने पर ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर फैला हुआ हो सकता है । द्रव का एक नमूना इकठ्ठा करने के लिए पेट में एक छोटी सुई डाली जाती है, बाद में उस नमूने की कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिती के लिए जांच कि जाती है।
इस तकनीक में डॉक्टर एक पतली, प्रकाशित ट्यूब का उपयोग करके ओवरी (अंडाशय) और अन्य पेल्विस (श्रोणि) अंगों और ऊतकों की जांच करते है। निचले पेट में एक छोटासा कट (चीरा) लगाकर उसके माध्यम से ट्यूब को अंदर डाला जाता है, और यह पेल्विस (श्रोणि) या पेट की छवियों को एक वीडियो मॉनिटर पर प्रसारित करता है। लेप्रोस्कोपी के परिणाम रोग के स्टेजिंग और उपचार योजना में मदद कर सकते हैं।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लिए उपचार योजना कई कारक जैसे की कैंसर का प्रकार और अवस्था, संभावित दुष्प्रभाव, महिला की उम्र और क्या वह उपचार के बाद बच्चे पैदा करने की योजना बना रही है आदी महत्वपूर्ण कारकों के आधार पर बनाई जाती है। सर्जरी अक्सर ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लिए अनुशंसित पहला उपचार है और इसमें ओवरी (अंडाशय) और फैलोपियन ट्यूब, यूटरस (गर्भाशय), उस क्षेत्र के लिम्फ नोड्स और आसपास के ऊतकों और अंगों को निकालना शामिल हो सकता हैं। आमतौर पर सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी की सलाह दी जाती है।
निदान की पुष्टि करने, कैंसर के चरण का निर्धारण करने और ट्यूमर को ऑपरेट करने के लिए सर्जरी की जा सकती है। ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर को सफलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा कई सर्जिकल दृष्टिकोणों पर विचार किया जाता है।
ट्यूमर का विश्लेषण करने के लिए लिम्फ नोड बायोप्सी में लिम्फ नोड के कुछ हिस्से या पूरे लिम्फ नोड को निकाल दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में एक ओवरी (अंडाशय) और एक फैलोपियन ट्यूब को निकालना शामिल होता है।
इस प्रक्रिया में ओवरी (अंडाशय) और फैलोपियन ट्यूब दोनों को निकाल दिया जाता है।
इस सर्जरी में पेरिटोनियम (जिसे ओमेंटम कहा जाता है) में ऊतक को निकालना शामिल है, जिसमें लिम्फ नोड्स भी शामिल हैं।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लिए कीमोथेरेपी देखभाल का स्वीकृत मानक रहा है। विशेष रूप से ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के उन्नत चरणों में, किसी भी अवशिष्ट बीमारी के इलाज के लिए, कीमोथेरेपी को सर्जरी के बाद, सहायक चिकित्सा के रूप में भी प्रशासित किया जा सकता है।
टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) में ऐसी दवाओं का उपयोग किया जाता है जो कैंसर सेल्स (कोशिकाओं), विशेष जीन और ट्यूमर के वातावरण में मौजूद विशिष्ट प्रोटीन कणों को लक्षित कर सकती हैं। आम तौर पर ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के जो मरीज़ अन्य उपचारों को अवरोध करते है या जिन मरीज़ों में ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का रिलैप्स (पुनरावर्तन) हुआ है उन मरीज़ों के इलाज के लिए टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) आरक्षित होती हैं। प्रशासन से पहले, कौन सी टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) सबसे प्रभावी होने की संभावना है इसकी जांच करने के लिए कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) का परीक्षण किया जाएगा ।
चूंकि महत्वपूर्ण अंग रेडिएशन (विकिरण) क्षेत्र में होते हैं, इसलिए ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के मामले में एक बड़ी खुराक सुरक्षित रूप से वितरित नहीं की जा सकती है। साथ ही, उन्नत चरण के ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) उपयोगी नहीं हो सकती है। इसलिए, अक्सर रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) को टाला जाता है क्योंकि महत्वपूर्ण अंग रेडिएशन (विकिरण) के कारण होने वाली जटिलताओं को सहन करने में असमर्थ हो सकते हैं।
यदि ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का जल्द पता चल जाए, तो इसका इलाज किया जा सकता है। कुछ मामलों में, उन्नत चरण के ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर का भी सकारात्मक नैदानिक परिणामों के साथ इलाज किया जा सकता है। ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लिए आज कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं जो न केवल सफल स्वास्थ्य परिणाम प्रदान करने में सहायता करते हैं बल्कि मरीज़ों के बीच जीवन की बेहतर गुणवत्ता का भी समर्थन करते हैं।
अधिकतर या बार बार, ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के लक्षणों को किसी अन्य कम गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के लक्षणों के रुप में समझा जा सकता हैं। निम्नलिखित कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनमें ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के समान ही लक्षण होते हैं :
ओवेरीअन सिस्ट (डिम्बग्रंथि गांठ) नियमित सेल्स (कोशिकाओं) के पॉकेट होते हैं, और ये आमतौर पर द्रव से भरे होते हैं। दूसरी ओर, ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) ट्यूमर अनियंत्रित रूप से विभाजित ट्यूमर सेल्स (कोशिकाओं) से बने असामान्य द्रव्यमान होते हैं।
हालांकि ओवेरीअन सिस्ट (डिम्बग्रंथि गांठ ) के लक्षण भी कैंसर के लक्षणों जैसे ही होते हैं, जैसे कि पेल्विस (श्रोणि) में दर्द, ब्लैडर (मूत्राशय) को खाली करने में कठिनाई, पेट फूलना, पेट के क्षेत्र में दबाव महसूस होना, आदि। ओवेरीअन सिस्ट (डिम्बग्रंथि गांठ) नॉन-कैंसरस होते हैं।
अधिकांश ओवेरीअन सिस्ट (डिम्बग्रंथि गांठ) प्रत्येक मासिक धर्म चक्र के साथ दिखाई देते हैं और गायब हो जाते हैं, और इसके बारे में कुछ भी घातक नहीं है। यद्यपि अधिकांश ओवेरीअन सिस्ट (डिम्बग्रंथि गांठ ) सौम्य होते हैं, रजोनिवृत्ति के बाद, ओवेरीअन सिस्ट (डिम्बग्रंथि गांठ) की उपस्थिति केवल ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के जोखिम को बढ़ाती है।
प्रत्येक मरीज़ द्वारा अनुभव किए गए दुष्प्रभाव सिफारिश कि गई उपचार योजना पर निर्भर हो सकते हैं। संभावित दुष्प्रभावों में बालों का झड़ना, मलत्याग की समस्याएं, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, मतली और उल्टी, मलत्याग की आदतों में बदलाव, संक्रमण का खतरा बढ़ जाना, दस्त, बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन (सिस्टिटिस) और रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) के बाद उपचार क्षेत्र पर त्वचा पर थोड़ी सी जलन शामिल हो सकती है।
जो महिलाएं रजोनिवृत्ति से नहीं गुजरी हैं, उन महिलाओं में ओवरी (अंडाशय) को निकालने से सर्जिकली - इंड्यूस्ड रजोनिवृत्ति हो सकती है इसलिए अब वे पर्याप्त एस्ट्रोजन नहीं बना सकती हैं। सामान्य रजोनिवृत्ति के लक्षण जैसे की हॉट फ्लशेस और योनि के सूखेपन के अलावा, एस्ट्रोजन का कम स्तर हड्डियों की क्षति और कार्डियोवैस्कुलर बीमारी को भी प्रेरित कर सकता है।
ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर के उपचार से जुड़े अन्य संभावित दुष्प्रभावों में थकान और न्यूरोपैथी, हाथों और पैरों में एक झुनझुनी और सुन्नता महसूस होना शामिल हैं।
आमतौर पर कुछ दुष्प्रभाव समय के साथ खत्म हो जाते हैं और उन्हें किसी चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, कुछ दुष्प्रभाव हैं जो उपचार की प्रतिक्रिया और मरीज़ों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं और उन्हें प्रबंधित करने के लिए चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।
यदि ओवरीज (अंडाशय) को निकाल दिया जाता हैं, तो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी मरीज़ों को उनके एस्ट्रोजेन स्तर को बहाल करने में मदद कर सकती है। ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) कैंसर मरीज़ों में आहार समायोजन और अन्य पोषण सहायता, दर्द प्रबंधन, और साइको-ऑन्कोलॉजी परामर्श और अन्य हस्तक्षेप दुष्प्रभावों के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं।
यदि आपकी उपचार योजना में गर्भाशय (गर्भ) के साथ-साथ दोनों ओवरीज (अंडाशय) और फैलोपियन ट्यूब को निकालना शामिल है, तो आप स्वाभाविक रूप से गर्भधारण नहीं कर पाएंगी।
हालाँकि, आपके पास अभी भी अन्य साधन उपलब्ध हैं जिनके द्वारा आप गर्भधारण कर सकती हैं। यदि आप उपचार के बाद गर्भधारण करना चाहती हैं, तो ओवेरियन कॉर्टेक्स क्रायोप्रेज़र्वेशन जैसे प्रजनन संरक्षण विकल्पों के बारे में अपने गाइनी-ऑन्कोलॉजिस्ट से बात करें, जिसमें उपचार से पहले ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) टिश्यू को फ्रीज़ करना शामिल है। उपलब्ध अन्य विकल्पों में आईवीएफ, सरोगेसी और गोद लेना शामिल हैं।